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सनातन पंचांग 07 फरवरी 2026: रविवारी सप्तमी व्रत, सूर्य पूजा विधि और रोग निवारण उपाय

सनातन पंचांग 07 फरवरी 2026: रविवारी सप्तमी व्रत, सूर्य पूजा विधि और रोग निवारण उपाय

सनातन धर्म में पंचांग केवल तिथि देखने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमें बताता है कि कौन सा दिन किस प्रकार के कर्म, व्रत और साधना के लिए श्रेष्ठ है
07 फरवरी 2026, शनिवार का दिन विशेष रूप से षष्ठी तिथि, शनिदेव उपासना, पीपल पूजन और आगामी रविवारी सप्तमी के कारण अत्यंत फलदायी माना गया है।
यहाँ हम जानेंगे — आज का पंचांग, शनिवार के उपाय, रविवार सप्तमी का महत्व, सूर्य पूजा विधि और घातक रोगों से मुक्ति के शास्त्रीय उपाय।


आज का सनातन पंचांग 07 फरवरी 2026 (शनिवार)

सनातन पंचांग 07 फरवरी 2026 के अनुसार आज का दिन ग्रह-नक्षत्रों की दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली है। शनिवार होने के कारण यह दिन विशेष रूप से शनिदेव की कृपा प्राप्त करने हेतु श्रेष्ठ माना जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि व्यक्ति को संयम, तप और आत्मशुद्धि का संदेश देती है। जो व्यक्ति आज के पंचांग को ध्यान में रखते हुए अपने दैनिक कार्य करता है, उसे अनावश्यक बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में स्थिरता आती है। यही कारण है कि आज का पंचांग केवल तिथि देखने तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन सुधार का मार्गदर्शन करता है।

आज का पंचांग 

विवरण जानकारी
दिनांक 07 फरवरी 2026
वार शनिवार
विक्रम संवत 2082
शक संवत 1947
अयन उत्तरायण
ऋतु शिशिर
मास फाल्गुन
पक्ष कृष्ण
तिथि षष्ठी (08 फरवरी रात्रि 02:54 तक)
नक्षत्र चित्रा (08 फरवरी रात्रि 02:28 तक)
योग शूल (रात्रि 11:41 तक)
राहुकाल 10:03 से 11:28
सूर्योदय 07:14
सूर्यास्त 06:31
दिशाशूल पूर्व

षष्ठी तिथि का धार्मिक महत्व और निषेध

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को शास्त्रों में विशेष संयम की तिथि बताया गया है। आज का पंचांग 07 फरवरी 2026 बताता है कि इस तिथि पर व्यक्ति को अपने आहार-विहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। ब्रह्मवैवर्त पुराण में षष्ठी तिथि पर कुछ वस्तुओं के सेवन को निषिद्ध बताया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह दिन आत्मनियंत्रण और साधना का है। 

षष्ठी तिथि को शास्त्रों में संयम और शुद्ध आचरण की तिथि माना गया है।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि इस तिथि को नीम की पत्ती, फल या दातुन का सेवन करना निषिद्ध है। ऐसा करने से मनुष्य को अगले जन्मों में नीच योनियों की प्राप्ति बताई गई है।

इसलिए इस दिन:

  • सात्विक भोजन करें

  • वाणी और आचरण में संयम रखें

  • अनावश्यक क्रोध और तामसिक प्रवृत्तियों से बचें

यह तिथि विशेष रूप से संतान सुख और पारिवारिक शांति से भी जुड़ी मानी जाती है।


शनिवार का महत्व और शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय

शनिवार का पंचांग बताता है कि यह दिन कर्मों के फल को नियंत्रित करने वाला है। शास्त्रों में शनिदेव को न्यायप्रिय देवता कहा गया है, जो व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार का पंचांग हमें यह संकेत देता है कि इस दिन दान, सेवा और संयम का विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष का स्पर्श, तिल के तेल का दीपक और मंत्र जप जैसे उपाय करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। नियमित रूप से शनिवार के उपाय करने वाले जातक के जीवन में स्थिर आय, मानसिक शांति और भयमुक्त जीवन देखने को मिलता है।

शनिवार को कर्मफल दाता शनिदेव की उपासना का दिन माना जाता है। जो व्यक्ति श्रद्धा से शनिदेव की पूजा करता है, उसके जीवन से दरिद्रता, बाधा और भय दूर होते हैं।

ब्रह्म पुराण के अनुसार:

  • शनिवार को पीपल के वृक्ष का स्पर्श करने से

  • शनिदेव की पीड़ा समाप्त होती है

  • ग्रहजन्य दोष शांत हो जाते हैं

शनिवार का विशेष उपाय

शनिवार प्रातः:

  • पीपल वृक्ष का दोनों हाथों से स्पर्श करें

  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें

यह उपाय शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या में अत्यंत लाभकारी माना गया है।


रविवारी सप्तमी 08 फरवरी 2026 का महत्व

08 फरवरी 2026, रविवार को रविवारी सप्तमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। रविवार सप्तमी व्रत विधि के अनुसार इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना चाहिए और नमक रहित भोजन का संकल्प लेना चाहिए। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से पूर्व मन, वाणी और कर्म की शुद्धता अत्यंत आवश्यक मानी गई है।

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो लंबे समय से शारीरिक या मानसिक रोगों से पीड़ित हैं। यदि रोगी स्वयं व्रत न कर सके, तो परिवार का कोई सदस्य उसके लिए यह व्रत कर सकता है। शास्त्रों में इसे रोग निवारण का प्रभावशाली व्रत कहा गया है।
शास्त्रों में कहा गया है कि रविवारी सप्तमी पर किया गया जप, दान और पूजा सूर्य ग्रहण के समान फल देता है।

इस दिन:

  • सूर्यदेव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है

  • रोग, निर्बलता और मानसिक तनाव में कमी आती है

  • सरकारी कार्य, नौकरी और प्रतिष्ठा से जुड़े कार्यों में सफलता मिलती है


घातक रोगों से मुक्ति का शास्त्रीय उपाय (रविवार सप्तमी)

यदि घर में कोई व्यक्ति:

  • लंबे समय से बीमार हो

  • घातक या असाध्य रोग से पीड़ित हो

तो रविवार सप्तमी के दिन यह उपाय अवश्य करें:

  • नमक रहित भोजन करें

  • बड़/पीपल वृक्ष के 108 फेरे लें

  • सूर्य भगवान को अर्घ्य दें

  • तिल के तेल का दीपक सूर्य को दिखाएँ

यदि रोगी स्वयं यह व्रत न कर सके, तो परिवार का कोई सदस्य उसके लिए यह विधि कर सकता है


सूर्य भगवान पूजन विधि (रविवार सप्तमी विशेष)

सूर्य पूजा जीवन में ऊर्जा, तेज, स्वास्थ्य और आत्मबल प्रदान करती है।
रविवार सप्तमी के दिन सूर्य पूजन का विशेष महत्व है।

पूजन विधि

  1. तिल के तेल का दीपक जलाएँ

  2. जल में चावल, शक्कर, गुड़, लाल फूल या कुमकुम मिलाएँ

  3. सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें

  4. सूर्य मंत्र का जप करें

सूर्य अर्घ्य मंत्र

जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम ।
तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ॥

  यहाँ जाने सम्पूर्ण पूजा विधि और लाभ: सूर्य पूजा विधि


सूर्य के 13 नाम मंत्र का महत्व

सूर्य पूजा विधि रविवार को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। प्रातःकाल तांबे के पात्र में जल, लाल फूल, गुड़ या शक्कर मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का उच्चारण करने से नेत्र दोष, हड्डी संबंधी समस्या और आत्मबल की कमी दूर होती है। नियमित सूर्य अर्घ्य से कुंडली का सूर्य मजबूत होता है, जिससे व्यक्ति को मान-सम्मान, यश और नेतृत्व क्षमता प्राप्त होती है।

सूर्य के 13 नामों का जप करने से:

  • नेत्र रोग दूर होते हैं

  • आत्मविश्वास बढ़ता है

  • कुंडली का सूर्य मजबूत होता है

यह जप विशेष रूप से रविवार सप्तमी को अत्यंत फलदायी माना गया है।


मंत्र जप के लिए विशेष तिथियाँ (शिव पुराण अनुसार)

शिव पुराण में वर्णित है कि:

  • सोमवती अमावस्या

  • रविवारी सप्तमी

  • मंगलवारी चतुर्थी

  • बुधवारी अष्टमी

ये तिथियाँ सूर्य ग्रहण के समान पुण्यकारी हैं।
इन दिनों किया गया जप और दान अक्षय फल देता है।


Frequently Asked Questions (FAQs)

Question.1. 07 फरवरी 2026 को कौन सा व्रत है?

 उत्तर: इस दिन षष्ठी तिथि और शनिवार का संयोग है, शनिदेव पूजा और संयम का दिन है।

Question.2. रविवारी सप्तमी का व्रत कौन कर सकता है?

उत्तर: रोगी, उसके परिवारजन या कोई भी श्रद्धालु यह व्रत कर सकता है।

Question.3. क्या रविवार सप्तमी पर नमक खाना वर्जित है?

उत्तर: हाँ, इस दिन नमक रहित भोजन करने से रोग निवारण में विशेष लाभ मिलता है।

Question.4. शनिवार को पीपल पूजन क्यों किया जाता है?

उत्तर: पीपल को शनिदेव का वास स्थान माना गया है, इससे शनि दोष शांत होता है।

Question.5. सूर्य अर्घ्य देने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उत्तर: सूर्योदय के समय अर्घ्य देना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।


07 फरवरी 2026 का शनिवार और 08 फरवरी की रविवारी सप्तमी
शनिदेव और सूर्यदेव — दोनों की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर है।
यदि श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ इन उपायों को किया जाए, तो
???? रोग, ग्रहदोष और जीवन की बाधाएँ निश्चित रूप से कम होती हैं।


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