28 जनवरी 2026 शुद्ध एकादशी व्रत: पूजा विधि, उपाय और शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग भारतीय जीवन परंपरा का वह आधार है, जो समय को केवल मापता नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित करने की दिशा भी देता है। प्रत्येक तिथि, वार, नक्षत्र और योग का अपना एक विशेष प्रभाव होता है, जो मनुष्य के मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक जीवन को प्रभावित करता है। 28 जनवरी 2026 का दिन पंचांग की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ता है और इस दिन कई शुभ संयोग बनते हैं।
माघ मास को शास्त्रों में पुण्य, स्नान, दान और आत्मशुद्धि का काल कहा गया है। इस मास में व्यक्ति का आचरण, विचार और दिनचर्या उसके जीवन पर गहरा प्रभाव डालती है। 28 तारीख 2026 इसी पवित्र मास का एक ऐसा दिन है, जो संयम, विवेक और आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।
हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यधिक महत्व दिया गया है। यह न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का अवसर है, बल्कि व्यक्ति के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। 28 जनवरी 2026 को माघ मास की शुक्ल एकादशी पड़ रही है। इस दिन सही पूजा, उपाय और नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति आती है।
28 जनवरी 2026 का हिन्दू पंचांग और इसका महत्व
28 जनवरी 2026 का दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि में आता है, और तत्पश्चात एकादशी प्रारंभ होती है। इस दिन का पंचांग केवल दिन-तिथि बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि किस समय कौन से कार्य करने से लाभ होगा और किन समय में सावधानी बरतनी चाहिए। उदाहरण के लिए, राहुकाल दोपहर 12:40 से 14:03 तक है, इस समय कोई महत्वपूर्ण कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है। वहीं, ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पूजा और ध्यान करना अत्यंत फलदायक है।
पंचांग में नक्षत्र, योग और वार का संयोजन आपके दिन के निर्णयों को प्रभावित करता है। कृत्तिका नक्षत्र प्रातःकाल तक प्रभावी रहता है, जो साहस, अनुशासन और आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है। तत्पश्चात रोहिणी नक्षत्र आरंभ होता है, जो संपन्नता, स्थिरता और धैर्य का प्रतीक है। ब्रह्म योग रात्रि 11:54 तक प्रभावी रहता है, जिससे इस समय की गई पूजा, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल मिलता है।
28 Jan 2026 Panchang विवरण तालिका
| पंचांग तत्व | विवरण |
|---|---|
| दिनांक | 28 जनवरी 2026 |
| वार | बुधवार |
| विक्रम संवत | 2082 |
| अयन | उत्तरायण |
| ऋतु | शिशिर |
| मास | माघ |
| पक्ष | शुक्ल |
| तिथि | दशमी शाम 04:35 तक, तत्पश्चात एकादशी |
| नक्षत्र | कृत्तिका 09:26 तक, तत्पश्चात रोहिणी |
| योग | ब्रह्म रात्रि 11:54 तक, तत्पश्चात इन्द्र |
| सूर्योदय | 07:08 |
| सूर्यास्त | 18:12 |
| राहुकाल | 12:40 से 14:03 |
| ब्रह्ममुहूर्त | 05:25 से 06:17 |
| अभिजीत मुहूर्त | नहीं |
| निशिता मुहूर्त | 00:14 से 01:06, 29 जनवरी |
| दिशा शूल | उत्तर |
| विशेष योग | सर्वार्थसिद्धि योग अहोरात्र |
एकादशी व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
एकादशी व्रत भगवान विष्णु की आराधना का विशेष दिन माना गया है। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन किया गया उपवास सभी पापों का नाश करता है और व्यक्ति की आत्मा को शुद्ध करता है। माघ शुक्ल एकादशी विशेष रूप से मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल बढ़ाने वाला दिन है।
व्रत केवल शरीर को नहीं, बल्कि मन को भी शुद्ध करता है। इस दिन किए गए उपायों और पूजा से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि, सुख-शांति और स्वास्थ्य में सुधार आता है। यदि व्रत नियमित रूप से किया जाए तो जीवन में लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और आर्थिक बाधाएँ कम होती हैं।
28 जनवरी 2026 को एकादशी व्रत की तैयारी और नियम
व्रत का सही समय और अवधि
एकादशी व्रत का प्रारंभ 28 जनवरी 2026 तिथि प्रारंभ होते ही होता है और यह अगले दिन 29 जनवरी 2026 सूर्यास्त तक रहता है। पूर्व तैयारी में 27 जनवरी को शाम से ही घर और पूजा स्थल को स्वच्छ करना, सात्त्विक भोजन करना और मानसिक तैयारी करना चाहिए।
क्या करें और क्या न करें
क्या करें:
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ब्रह्ममुहूर्त में उठकर सूर्यस्नान करना
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सात्त्विक भोजन ग्रहण करना (फल, हल्की सब्जियां, दूध)
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घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखना
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भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा
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ध्यान, मंत्र जाप और कथा श्रवण
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जरूरतमंदों को दान देना
क्या न करें:
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क्रोध, झगड़ा और विवाद से बचें
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अनाज, मांस और शराब का सेवन न करें
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राहुकाल में कोई नया कार्य न करें
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नकारात्मक विचार और अशुद्ध क्रियाओं से दूर रहें
यह नियम न केवल व्रत को सफल बनाते हैं, बल्कि जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक स्थिरता भी लाते हैं।
पूजा विधि और मंत्र जाप
व्रत वाले दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें और दीपक जलाएं। पुष्प और सुगंधित धूप अर्पित करें। इस दौरान मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का 108 बार जप करें। पूजा समाप्त होने पर दान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
यह प्रक्रिया केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम भी है।
एकादशी व्रत के लाभ और हानि
लाभ:
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मानसिक स्थिरता और मानसिक तनाव में कमी
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शारीरिक स्वास्थ्य और पाचन में सुधार
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आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा
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आर्थिक बाधाओं में कमी और समृद्धि
हानि:
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अनुचित आचरण, क्रोध और राहुकाल में कार्य करने से व्रत का फल कम हो सकता है
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तामसिक भोजन या नकारात्मक विचार से मानसिक अशांति और स्वास्थ्य पर असर
28 जनवरी 2026 को कौन सी तिथि है
28 जनवरी 2026 को हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रहती है। यह तिथि शाम 04:35 बजे तक प्रभावी रहती है, जिसके बाद शुक्ल एकादशी तिथि प्रारंभ हो जाती है। दिन का अधिकांश भाग दशमी तिथि के अंतर्गत आता है, इसलिए इस दिन का स्वभाव और प्रभाव दशमी तिथि से जुड़ा माना जाता है।
दशमी तिथि को मर्यादा, विजय और आत्मसंयम का प्रतीक माना गया है। यह तिथि व्यक्ति को आवेग और जल्दबाजी से बचकर विवेकपूर्ण निर्णय लेने की प्रेरणा देती है।
दशमी तिथि पर क्या करना चाहिए
माघ शुक्ल दशमी के दिन संयमित और संतुलित दिनचर्या अपनाना विशेष लाभकारी माना गया है। इस दिन प्रातःकाल स्नान करके मन को शांत रखना और कुछ समय आत्मचिंतन या ध्यान में बिताना मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। सात्त्विक आहार ग्रहण करना, सत्य और मधुर वाणी का प्रयोग करना तथा अनावश्यक विवाद से दूर रहना इस तिथि के स्वभाव के अनुकूल माना गया है।
इस दिन दान, सेवा और सहयोग की भावना विशेष फल देती है। सूर्य उपासना, जप और शांत मन से किया गया कार्य व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
दशमी तिथि पर क्या नहीं करना चाहिए
दशमी तिथि पर अत्यधिक क्रोध, अहंकार और जल्दबाजी से बचना आवश्यक माना गया है। इस दिन कटु शब्द, अपमानजनक व्यवहार और अनावश्यक तनाव मानसिक अशांति का कारण बन सकता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार दशमी तिथि को भारी और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
ब्रह्मवैवर्त पुराण में उल्लेख मिलता है कि दशमी तिथि को कलंबी का शाक त्याज्य माना गया है। राहुकाल के समय शुभ कार्यों की शुरुआत करने से भी बचना उचित माना जाता है।
सूर्यस्नान का महत्व
एकादशी व्रत के दिन सूर्यस्नान लेना अत्यंत लाभकारी है। सूर्य की किरणों में रोगनाशक शक्ति है। प्रतिदिन 8 मिनट सूर्य की ओर मुख करके और 10 मिनट पीठ करके बैठना रक्त संचार, प्रतिरक्षा और मानसिक ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।
डॉक्टर सोले और डॉक्टर होनर्ग ने सूर्यस्नान के माध्यम से कमजोरी, थकान, हीमोग्लोबिन की कमी और नसों की दुर्बलता में सुधार देखा है। यह केवल आध्यात्मिक लाभ नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।
चिंतन: जीवन में संतुलन और समझ
28 जनवरी 2026 की रात्रि चिंतन यह सिखाती है कि जीवन में संतुलन और समझ बनाए रखना बहुत जरूरी है। चिंता यदि अपार हो जाए तो जीवन बिखर जाता है, लेकिन उसी चिंता पर विवेकपूर्ण विचार करने से जीवन निखर जाता है।
रिश्तों को संभालना आवश्यक है, क्योंकि खोए हुए रिश्ते कभी वापस नहीं आते। तीन चीजें जीवन में कभी वापस नहीं आतीं: बोले हुए शब्द, बीता हुआ समय और टूटा हुआ विश्वास।
28 जनवरी 2026 का शुद्ध एकादशी व्रत शरीर, मन और आत्मा तीनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
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ब्रह्ममुहूर्त में सूर्यस्नान और पूजा
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सात्त्विक आहार और अनाज का त्याग
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भगवान विष्णु की आराधना और दान
इन उपायों को अपनाने से व्यक्ति सफलता, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त करता है। यह दिन केवल व्रत का अवसर नहीं, बल्कि ध्यान, साधना, संयम और सकारात्मक जीवन जीने का अवसर भी है।
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